भिक्षुक से ज्यादा कष्ट प्रद भिक्षुक की वृत्ति


      भिक्षुक से ज्यादा कष्ट प्रद   भिक्षुक की वृत्ति

हम भिक्षुक शब्द सिर्फ जो रास्ते में पैसे मांगता है उस तक सीमित रखते है

जहा तक मेरा व्यक्तिगत अनुभव है की अधिकांश भिक्षुक जो लंबे समय से पैसा मांग रहे है उनकी पैसे मांगने की आदत उनके जीवन का अंग बन गई है

आइए भिक्षुक शब्द को समझते है।भिक्षा मांग कर जीवन यापन करने वाला भिक्षुक

भिखारी शब्द भी भिक्षुक का उदगम है

पुरातन गुरु परंपरा में लोग सदा तत्पर रहते थे भिक्षा देने में कोई भिक्षुक घर के द्वार खाली जाए तो अपशगुन मानते थे 

एवम भिक्षा मांगने वाला भी जो उसको भिक्षा में मिलता था उसे स्वीकार कर आशीर्वाद दे कर जाता था

वर्तमान में यह युग कलयुग है जिसमे दैविक संपदा असुरीय संपदा दोनो इंसान में ही मौजूद है।।एक युग सतयुग था जिसमे दानव देवताओं के अलग अलग लोक हुआ करते थे।त्रेता युग में दो देश हुए।द्वापर में एक ही परिवार में,कलयुग में दोनो असुर देवता इंसान में ही मौजूद है

आज के परिवेश में भिक्षुको की बात करे तो मेरे हिसाब से कई प्रकार के भिक्षुक हर इंसान में मोजूद है आइए जानते है

1) अर्थ पैसों का भिक्षुक भिखारी

जगह जगह रास्ते में आपको भिक्षुक मिलते होगे जो आपसे कुछ मांगते होगे पर शर्त के साथ बच्चे के दूध से ले कर शनि भगवान के नाम पर।।

इन लोगो को शहर की संस्था प्रशासन की मदद से एक आश्रम में  पारिवारिक माहौल में रखा गया है

 भिक्षुक याने भिखारी

जाने भिखारियों के प्रकार

1 पैसों का भिक्षुक

सामान्यतः जगह जगह अपनी समस्या बतलाते हुए भगवान के नाम विकलांगता के नाम पर,बच्चे को गोद में लिए  रोड पर पैसे  मांगते दिखते हे।अधिकांश हिस्सा भिक्षुक वृत्ति के कारण दिखता है एक दिन भोजन की व्यवस्था होने पर भी वोह वृत्ति के कारण मांगने में लगा रहता है

सामाजिक संस्थाएं अपना काम करती हे।।

भिक्षुक वृत्ति को खत्म करने के लिए आध्यात्मिक लोगो को आना होगा जो उनको मानव मूल्य का महत्व इस धरती पर क्यू आए हो

आप मांगने नही बाटने आए हो

" हर इंसान में कही न कही भिक्षुक मोजूद है कही पैसे का,कही प्रशंसा का,कही सांत्वना का,

अपने आप से भी बात कर के देखे 

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